मंगलवार, अक्तूबर 19

कविता:- मटका

मटका
मटका अपना गोल - गोल
अन्दर से है पोल - पोल
मिटटी का ये बना हुआ है
गोल - गोल ये बना हुआ है
जिसके घर में मटका होता है
ठंढा पानी पीता है
मटका जल्दी फूट जाता है
मटका अपना गोल - गोल
अन्दर से है पोल - पोल
लेखक : ज्ञान

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