बुधवार, अगस्त 14

कि हर कोई आज़ाद है …

कल हर जगह झण्डे फहराये जायेंगे
कल हर जगह लड्डू बाँटें जायेंगे
कल हर कोई किसी न किसी को बधाई दे रहा होगा
कल हर कोई एक झूठ को जी रहा होगा
कि हर कोई आज़ाद है.…
कि हर कोई आज़ाद है …

1 टिप्पणी:

  1. बहुत खूब , शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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