मंगलवार, नवंबर 8

मेरी कविता - छोटा बच्चा

अभी तो हूँ एक  छोटा बच्चा, 
लक्ष्य मगर है मेरा अच्छा...
पढ़ लिख कर अच्छा इंसान बनूँ ,
अपने देश के काम आऊ...
-- मैदुल  
अपना स्कूल
पनकी पड़ाव

1 टिप्पणी:

  1. मेरे बचपन की कविता...

    मैं हूं बच्चा
    अकल का कच्चा,
    लेकिन सच्चा।
    पढने जाता रोज स्कूल,
    घर पर आकर जाता भूल,
    क्या..पढाई..
    फ़िर भी लेकिन
    कभी न मैंने,
    पंडित जी से मार है खाई;
    क्योंकि आखिर मैं हूं बच्चा,
    अकल का कच्चा,
    लेकिन सच्चा ॥

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