बचपन के रंग में हम अपनी बातों, अपनी कोशिश और अपने विचारों को रख कर आप तक पहुँचाना चाहते है.
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शनिवार, अक्टूबर 20
कविता - सर्दी आई
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शनिवार, अप्रैल 23
बाल कविता : एक मकान में चार दुकान।
एक मकान में चार दुकान।
बनते थे सब में पकवान।।
चारो दुकानों में मोटे हलवाई।
करते रहते दिन रात लड़ाई॥
लड़ाई में क्या होते थे मुद्दे।
दुकान में सौदे हो जाते थे मद्दे ॥
चारो दुकानों में सन्डे को होता था अवकाश।
उस दिन चारों हलवाई नहीं करते थे बकवास॥
एक मकान में चार दुकान।
बनते थे सब में पकवान॥
बनते थे सब में पकवान।।
चारो दुकानों में मोटे हलवाई।
करते रहते दिन रात लड़ाई॥
लड़ाई में क्या होते थे मुद्दे।
दुकान में सौदे हो जाते थे मद्दे ॥
चारो दुकानों में सन्डे को होता था अवकाश।
उस दिन चारों हलवाई नहीं करते थे बकवास॥
एक मकान में चार दुकान।
बनते थे सब में पकवान॥
लेखक : ज्ञान कुमार
कक्षा : सात
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मंगलवार, जनवरी 11
लक्ष्मी का चित्र
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सोमवार, जनवरी 10
दुर्गा का चित्र
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कुलदीप का चित्र
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शनिवार, जनवरी 8
विनीत का चित्र
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कविता : मेरी बत्तख
मेरी बत्तख
पंख सुनहरे चोच है पीली,
करती है ये मनमानी...
मेरी बत्तख निराली कितनी.
केवल पीती पानी है...
लेखक : मैना खातून
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सरवन का चित्र
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सोमवार, जनवरी 3
शीबू का चित्र
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भूख
भूख की कविता
भूख पर नहीं लिखी जा सकती कोई सुंदर सी कविता
दरअसल बेहद डरावना है भूख का चेहरा
हम में से कई लोग भूखे रहते हैं कई बार
इसलिए की सुधर सखे सेहत
लेकिन
जिन लोगों की सेहत
बिलबिलाती भूख से नहीं रहती दुरुस्त
बिलबिलाती भूख से नहीं रहती दुरुस्त
सोचिये जारा एक पल, कितना भयानक होता है
भूख का चेहरा
...........ये कविता मैंने "भूख का मानचित्र" नमक किताब से ली है
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रविवार, जनवरी 2
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कविता : मिट्ठू राम
मिट्ठू राम
करता नहीं जरा सा काम,
कुतर-कुतर कर खाता है...
सुबह से हो जाती है शाम,
मेरा प्यारा मिट्ठू राम...
करता नहीं जरा सा काम,
कुतर-कुतर कर खाता है...
सुबह से हो जाती है शाम,
मेरा प्यारा मिट्ठू राम...
लेखक : समीरन खातून
अपना स्कूल
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शनिवार, जनवरी 1
सलेहा का चित्र
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गुरुवार, दिसंबर 30
पम्प चला दो, हवा निकल गयी पहिया की......
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मैना खातून का चित्र
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बुधवार, दिसंबर 29
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सोमवार, दिसंबर 27
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रविवार, दिसंबर 26
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