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सोमवार, नवंबर 29

कविता: भालू भइया मंत्री बन गए .....

भालू भइया मंत्री बन गए


जंगलवासी सुनो एक ख़बर,
करना ना कोई अगर - मगर....
लोमड़ी एक दिन रोती आई,
शेर से अपनी बात बताई....
शेर ने पूछा क्या हो गया,
लोमड़ी बोली पूँछ कट गया....
शेर ने झट डाक्टर बुलवाया,
दौड़ के डाक्टर जल्दी आया....
डाक्टर थे भाई भालू लाला,
ढूंढ़ के फेविक्युक ले आया....
झट से उसके पूँछ में लगाई,
लोमड़ी रानी खूब चिल्लाई....
उसकी झट से पूँछ जुड गई,
डाक्टर भालू की चर्चा फ़ैल गई....
शेर राजा झूम के गाये,
लोमड़ी रानी खुशी से नाचे....
शेर राजा खुश हो गए,
भालू भइया मंत्री बन गए....
जंगलवासी सुनो एक ख़बर,
करना ना कोई अगर - मगर....
लेखक: मुकेश कुमार

शनिवार, नवंबर 27

कविता: लालू भइया ........

लालू भइया ........


लालू भइया बड़े दयालू,
खाते जाते हरदम आलू....
घर में पहुंचे बन गए भालू,
इसलिए हम कहते लालू....
लालू भइया बड़े दयालू,
उनके दोस्त है मोटे कालू....
लालू जम के खाते अंडा,

खूब लहराते देश का झंडा....
लालू भइया बहुँत है छोटे,
इसीलिए दिखते है मोटे. ..
लालू भइया बड़े है भोले,
रखते मुंह में पान के गोले....
लालू भइया बड़े दयालू,
दान में हरदम देते आलू....
लालू जब भी खाते आलू,
उनके घर में आता भालू....

लेखक: मुकेश कुमार

शुक्रवार, नवंबर 19

कविता: चूहे राजा की रानी

चूहे राजा की रानी


एक चूहे की तीन रानी,
तीनों रानी बड़ी सयानी ...
एक थी कानी पर कोयल जैसी बाणी,
बाते करती ऐसी जैसी सबकी हो नानी...
एक थी लगडी सर पर डाले पगड़ी,
हट्टी -कट्टी और थी मोटी तगड़ी...
एक थी सीधी -साधी प्यारी सी,
राजा को लगती राजकुमारी सी...
दोनों रानी इस बात से चिढ़ती थी,
राज के कान को भरती थी...
एक दिन दोनों राजा के उपर गिर गई,
राजा की पूछ उनके वजन से दब गई...
कानी लगडी का वजन था ज्यादा,
चूहे राजा को याद आ गए दादा ...
दर्द ने राजा के गुस्से को भड़काया,
राजा ने रानी को घर से मार भगाया...
लेखक: आदित्य कुमार

गुरुवार, नवंबर 18

बच्चों को कोचिंग पढने के लिए मजबूर करते अध्यापक


बच्चों को कोचिंग पढने के लिए मजबूर करते अध्यापक

कक्षा सात की बात है| हम सभी लोग उस समय पहली बार किसी सरकारी स्कूल में गए थे, इससे पहले हम सब कभी किसी सरकारी स्कूल में नहीं गए थे | उस स्कूल के अध्यापकों के विषय में ज्यादा जानकारी नहीं थी | जैसे ही हम लोग अपनी - अपनी कक्षा में गए, वैसे ही कुछ लड़के हम लोगों के पास मिलने आये और बातचीत करने लगे और अध्यापकों के मारने के विषय में बताने लगे, पर हम लोगों को उन लड़कों की बातों पर यकीन नहीं हो रहा था | कुछ समय के बाद पढाई शुरु हुई, गणित के अध्यापक गणित के सवाल बोर्ड में लगवा रहे थे कि एक लड़के ने अध्यापक जी से पूंछ लिया कि सर ये सवाल कैसे लगाया है ? फिर से बता दीजिये ताकि मुझे समझ में जाये | अध्यापक जी ने उसे अपने पास बुलाया और उसे दो थप्पड़ मारे और उससे कहने लगे कि ज्यादा समझना है तो कोचिंग में पढ़ने आना समझे , और कहा कि चुप - चाप जाकर अपनी सीट में बैठ जाओ | तब जाकर मुझे उन लड़कों की बातों पर यकीन हुआ कि वाकई में यह स्कूल एक डेंजर स्कूल है | मन में ये भी सवाल उठता है कि सरकारी मोटी वेतन पाने वाले ये अध्यापकों का कब पेट भरेगा ? सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले हम बच्चों का ये शोषण करना कब बंद करेंगे। . हम जैसे गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा, इन सरकारी स्कूलों में क्या कभी मिल सकेगी .......


आदित्य कुमार

कविता = मेरी कविता सुन लो भईया

सोमवार, नवंबर 15

कविता: थाली और गिलास

थाली और गिलास


एक थी थाली एक था गिलास,
खाने में मिलते हरदम साथ...
हर घर में वे रहते साथ,
एक दूजे से करते बात...
एक दिन थाली की आई बारात,
चम्मच कटोरी जमके नाचे साथ...
दूल्हा बन ठुमके थे गिलास,
दोनों की शादी हो गई साथ...
एक थी थाली एक था गिलास,
खाने में मिलते हरदम साथ
....
लेखक: जमुना कुमार

कविता: गुरु जी की मार

गुरु जी की मार


गुरु जी हमारे कितने प्यारे,
हरदम पाठ पढाते प्यारे...
हम भी पढ़ते जाते सारे,
याद हमको होते प्यारे...
कक्षा में जब गुरु जी बोले,
पाठ सुनाओ बेटा भोले...
हम तो भइया गए भूल,
सोचा क्यो आए स्कूल...
गुरु जी को गुस्सा आया,
खूब पड़े फ़िर मुझको रूल...
याद गई मेरी नानी,
ख़त्म हुई अब मेरी कहानी...
लेखक :चंदन कुमार