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शनिवार, अक्टूबर 20

कविता - सर्दी आई

मुन्ना जी क्यों काँपे थर-थर,
क्या घर में हुई पिटाई। 
भैया ऐसी बात नहीं है,
मुझे कपकपाती सर्दी है आई। 


----सालेह 
अपना स्कूल
 पनकी पड़ाव 

गुरुवार, अक्टूबर 4

श्रवण कुमार का चित्र

अपना स्कूल पनकी पड़ाव की बच्ची शालेहा ने श्रवण कुमार का एक बहुत ही सुन्दर चित्र बनाया था जिसको में आप सभी के सामने रख रहा हूँ।

 

शुक्रवार, अगस्त 31

मेरे चित्र

एक बच्ची ने एक बुजुर्ग को रस्ते पर लोगों से कुछ मांगते हुए देखा और वह उसको रोज देखती थी . एक दिन उस बच्ची ने अपने कला करने के समय में उस बुजुर्ग का चित्र बनाने की कोशिश की।


गुरुवार, अप्रैल 26

चिंता रहती है....

वीरों को - आन की
नाविक को - तूफ़ान की
मुसाफिर को - सामान की
भिखारी को - दान की
ऋषि को - वरदान की
कंजूस को - मेहमान की
गायक को - तान की
छात्र को - इम्तेहान की
पंक्षी को - उड़ान की
प्रोफ़ेसर को - बखान की
आमिर को - शान की
किसान को - लगान की
नेता को - मतदान की
भगवान को - जहान की
शराबी को - शुरापान की
ड्राईवर को - चालान की
कायर को - जान की
कमज़ोर को - बलवान की
व्यापारी को - नुकशान की
माँ-बाप को - संतान की 

---  शैलेन्द्र शील पाठक

मंगलवार, नवंबर 8

मेरी कविता - छोटा बच्चा

अभी तो हूँ एक  छोटा बच्चा, 
लक्ष्य मगर है मेरा अच्छा...
पढ़ लिख कर अच्छा इंसान बनूँ ,
अपने देश के काम आऊ...
-- मैदुल  
अपना स्कूल
पनकी पड़ाव

सोमवार, अक्टूबर 24

मेरी कविता : लाल टमाटर

गोल गोल ये लाल टमाटर,
होते जैसे गाल टमाटर...
खून बढ़ता लाल टमाटर,
फुर्ती लाता लाल टमाटर...
हम खायेंगे लाल टमाटर,
बन जायेंगे लाल टमाटर...
-- सालेह 
अपना स्कूल
पनकी पड़ाव   

सोमवार, सितंबर 19

कविता - मेरी कमीज़

मेरे पास एक कमीज़ है,
उसमे सितारे लगे हुए है...
सितारे बहुत चमकीले है,
हरे, नीले, पीले है...

                                       ........शालेहा
                                            अपना स्कूल पनकी पड़ाव.

सोमवार, मई 16

बिठूर यात्रा - 4

नानाराव पार्क घूमने के बाद हम सभी लोग बाल्मीकि आश्रम देखने के लिए निकले, बच्चो ने यहाँ पर वो जगह बहुत गौर से देखी जिसके बारे में ये कहा जाता है की उसी जगह पर सीता जी जमीन के अन्दर चली गयी थी. बाल्मीकि आश्रम से निकल कर हम सभी लोग सुधांशु आश्रम घुमाने के लिए निकले. आश्रम में बनी गुफा के बच्चों ने बहुत मज़ा किया और उसको दुबारा घुमने के लिए कहने लगे. आश्रम घुमने के बाद हम लोग घर की तरफ चल पड़े...














और हमारी यात्रा पूरी हुई.....

गुरुवार, मई 5

बिठूर यात्रा - 3

पत्थर घाट घुमाने के बाद हम सभी लोग ने भोजन किया. भोजन करने के बाद बाद हम सभी ने यहाँ कुछ खेलकूद किया और गंगा नदी का मज़ा लिया. फिर हम लोग यहाँ से लौट के अपनी गाडी में बैठ गए और नानाराव पार्क के लिए निकल पड़े, करीब 10 मिनट के बाद हम लोग नानाराव पार्क पहुँच गए. फिर हम लोग अंदर जाने का टिकट लिया जो की 5 रुपये का था, हम लोगो ने पूरे पार्क में घुमे और बच्चों ने पार्क में कुछ कविता सुने, के.यम.भाई ने नानाराव, बाजीराव पेसवा, रानी लक्ष्मी बाई के बारे में बच्चों को बताया.

कुछ तस्वीरें ...