मेरी कल्पना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मेरी कल्पना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, नवंबर 8

मेरी कविता - छोटा बच्चा

अभी तो हूँ एक  छोटा बच्चा, 
लक्ष्य मगर है मेरा अच्छा...
पढ़ लिख कर अच्छा इंसान बनूँ ,
अपने देश के काम आऊ...
-- मैदुल  
अपना स्कूल
पनकी पड़ाव

रविवार, अक्टूबर 9

मेरी कविता

रामू बाज़ार से आया,
पूछो पूछो क्या क्या लाया....
आलू, टमाटर, गोभी, गाजर,
आओ-आओ सब मिलकर खाओ...

--- अपना स्कूल का बालक

गुरुवार, अगस्त 11

लुटने वालों, तुम लुटते रहो...

लुटने वालों, तुम लुटते रहो,
हम तो चुपचाप सब देखेंगे...
तुम से ही ये देश चल रहा है,
तुम पर ही ये अर्थव्यस्था टिकी है.....
पर अरे ये क्या हुआ कुछ लूटने वाले पकडे गए,
कुछ गड़बड़ी पकड़ी गयी...
अरे - अरे देखो देश की अर्थव्यस्था गिर रही है,
देश का विकास तो रुक सा ही गया...
सत्यानाश हो इन लूटने वालों को पकड़ने वालों का,
देश को पीछे धकेलने वालों का....

...दीन दयाल सिंह

शनिवार, अप्रैल 23

बाल कविता : एक मकान में चार दुकान।

एक मकान में चार दुकान।
बनते थे सब में पकवान।।
चारो दुकानों में मोटे हलवाई।
करते रहते दिन रात लड़ाई॥
लड़ाई में क्या होते थे मुद्दे।
दुकान में सौदे हो जाते थे मद्दे ॥
चारो दुकानों में सन्डे को होता था अवकाश।
उस दिन चारों हलवाई नहीं करते थे बकवास॥
एक मकान में चार दुकान।
बनते थे सब में पकवान॥

लेखक : ज्ञान कुमार
कक्षा : सात