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गुरुवार, सितंबर 20

मेरी कविता - बकरी

मेरी बकरी काली काली,
सीधी-सीधी भोली-भली।
इसकी तो हर बात निराली,
खाकर पत्ते करे जुगाली।
दूध इसका मीठा-मीठा, 
मुन्ना इसका बहुत अनूठा।

 कवि - काजीमुददीन
अपना स्कूल पनकी पड़ाव


बुधवार, नवंबर 30

कविता - अपने देश के नेता...

अपने देश के नेता...

है अपने देश के नेता ऐसे।
देखो खाते जनता का पैसे॥
घोटाले ये खूब है करते।
नहीं किसी से अब ये डरते॥
अरबो का है किया घोटाला।
जनता को भूखो मार डाला॥
नेता मिलकर करे पैसो का हाजमा।
स्विस बैंक में करते सारा पैसा जमा॥
अगर ये सारा पैसा वापस आ जाये।
देश की जनता माला-माल हो जाये॥
नेताओं की अब तो मिलकर करो दवाई।
भ्रष्ट है जो भी नेता उनकी करो सफाई॥
है अपने देश के नेता ऐसे।
देखो खाते जनता का पैसे॥

लेख़क: सागर कुमार, कक्षा ७, अपना घर

मंगलवार, नवंबर 8

मेरी कविता - छोटा बच्चा

अभी तो हूँ एक  छोटा बच्चा, 
लक्ष्य मगर है मेरा अच्छा...
पढ़ लिख कर अच्छा इंसान बनूँ ,
अपने देश के काम आऊ...
-- मैदुल  
अपना स्कूल
पनकी पड़ाव

सोमवार, अक्टूबर 24

मेरी कविता : लाल टमाटर

गोल गोल ये लाल टमाटर,
होते जैसे गाल टमाटर...
खून बढ़ता लाल टमाटर,
फुर्ती लाता लाल टमाटर...
हम खायेंगे लाल टमाटर,
बन जायेंगे लाल टमाटर...
-- सालेह 
अपना स्कूल
पनकी पड़ाव   

बुधवार, मार्च 16

ज़फर भाई बच्चों के साथ

सलाम साथियों 
कैसे है आप लोग उम्मीद है की आप लोग अच्छे होगें. 
ज़फर भाई 12 मार्च को मोहनपुर गाँव में गए और वहां चल रहे पुस्तकालय को देखा. उन्होंने बच्चों के साथ गीत गए और कुछ कविताएँ सुनी. 
कुछ फोटो बच्चों के साथ.