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बुधवार, अप्रैल 18

कविता - सब कुछ बदल गया....

ये दुनिया बदल गयी,
ये जहाँ बदल गया ।
आज के इस संसार में,
ये इन्सान ही बदल गया ।

आज नेताओं और लोगों के चरित्र,
बदल गए ।
भ्रष्टाचारी इस देश में,
गरीबी के मायने बदल गए ।

नेता वोटों के खातिर,
जाने क्या क्या वादे कर गए ।
वादों को भी न पूरा किया,
पर अपनी झोली ये भर ले गए ।   

कवि : धर्मेन्द्र कुमार

सोमवार, सितंबर 19

कविता - मेरी कमीज़

मेरे पास एक कमीज़ है,
उसमे सितारे लगे हुए है...
सितारे बहुत चमकीले है,
हरे, नीले, पीले है...

                                       ........शालेहा
                                            अपना स्कूल पनकी पड़ाव.

गुरुवार, अगस्त 11

लुटने वालों, तुम लुटते रहो...

लुटने वालों, तुम लुटते रहो,
हम तो चुपचाप सब देखेंगे...
तुम से ही ये देश चल रहा है,
तुम पर ही ये अर्थव्यस्था टिकी है.....
पर अरे ये क्या हुआ कुछ लूटने वाले पकडे गए,
कुछ गड़बड़ी पकड़ी गयी...
अरे - अरे देखो देश की अर्थव्यस्था गिर रही है,
देश का विकास तो रुक सा ही गया...
सत्यानाश हो इन लूटने वालों को पकड़ने वालों का,
देश को पीछे धकेलने वालों का....

...दीन दयाल सिंह

रविवार, जनवरी 9

ताजमहल को दुनिया के अजूबों में क्यों शामिल किया जाता है...?"

अध्यापक ने कक्षा से सवाल किया,
 
"क्या तुम लोग बता सकते हो, ताजमहल को दुनिया


के अजूबों में क्यों शामिल किया जाता है...?"


रोहन ने हमेशा की तरह तपाक से जवाब दिया,


"सर, ताजमहल को अजूबा इसलिए कहा जाता है,  


क्योंकि शाहजहां ने इसे किसी भी बैंक से

लोन लिए बिना बनवा दिया था..."

 
    
शायद आज की महंगाई के आगे ये बात बिल्कुल सही है .........
आप क्या कहते है....................?

..............ये रचना मैंने थोडा मुस्कुरा करा देखो ब्लॉग से लिया है