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बुधवार, अप्रैल 18

कविता - सब कुछ बदल गया....

ये दुनिया बदल गयी,
ये जहाँ बदल गया ।
आज के इस संसार में,
ये इन्सान ही बदल गया ।

आज नेताओं और लोगों के चरित्र,
बदल गए ।
भ्रष्टाचारी इस देश में,
गरीबी के मायने बदल गए ।

नेता वोटों के खातिर,
जाने क्या क्या वादे कर गए ।
वादों को भी न पूरा किया,
पर अपनी झोली ये भर ले गए ।   

कवि : धर्मेन्द्र कुमार

बुधवार, नवंबर 16

याद आते है वो दिन.......


 
याद आता है वो दिन जब हम सब भी ऐसा ही कुछ किया करते थे, और अब कहते है की क्या यार सुई से डरते हो......