गुरुवार, जनवरी 20

कभी तो हम जीतेंगे...

कब तक अँधेरे से डर कर चुप रहेंगे,
कभी न कभी को सामना करना ही है...
तो क्यों न आज ही कोई कदम उठाने की सोचे,
और कोशिश करे की एक बार मुकाबला तो हो...
हर जीत तो लगी ही रहती है,
कभी तो हम जीतेंगे...

.................................दीन दयाल सिंह

बच्चे मन के सच्चे


शनिवार, जनवरी 15

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

..........................................हरिवंशराय बच्चन

सूरज का चित्र

रविवार, जनवरी 9

ताजमहल को दुनिया के अजूबों में क्यों शामिल किया जाता है...?"

अध्यापक ने कक्षा से सवाल किया,
 
"क्या तुम लोग बता सकते हो, ताजमहल को दुनिया


के अजूबों में क्यों शामिल किया जाता है...?"


रोहन ने हमेशा की तरह तपाक से जवाब दिया,


"सर, ताजमहल को अजूबा इसलिए कहा जाता है,  


क्योंकि शाहजहां ने इसे किसी भी बैंक से

लोन लिए बिना बनवा दिया था..."

 
    
शायद आज की महंगाई के आगे ये बात बिल्कुल सही है .........
आप क्या कहते है....................?

..............ये रचना मैंने थोडा मुस्कुरा करा देखो ब्लॉग से लिया है 

कुंती का चित्र

शनिवार, जनवरी 8

विनीत का चित्र

कविता : मेरी बत्तख

मेरी बत्तख
पंख सुनहरे चोच है पीली,
करती है ये मनमानी...
मेरी बत्तख निराली कितनी.
केवल पीती पानी है...
लेखक : मैना खातून 
अपना स्कूल

सरवन का चित्र