मंगलवार, जुलाई 16

कहो "कुपोषण भारत छोड़ो"

आजकल अभिनेता आमिर खान को भारत से कुपोषण हटाने का जिम्मा या कहे तो ठेका मिला हुआ है, वह दूरदर्शन पर हर 15 मिनट में लोगों को बताते रहते है की कैसे कुपोषण को दूर भगाना है जिसमे वह कहते है की लड़की की शादी 18 साल के बाद करना है। कुछ युवा भी आमिर के साथ दीखते है जो सपथ लेते है की वह 18 साल और इससे बड़ी लड़की से ही शादी करेंगे। 6 महीने तक बच्चे को माँ का दूध देना है। ऐसे की कई तरीके बताते है।

मेरे पास भी एक तरीका है जिससे कुपोषण ख़त्म हो या न हो पर कम जरुर हो जायेगा। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दिया जाने वाले आहार सही में उनको दिया जाये और इस आहार की काला बाजारी रोकी जाये।

आमिर जी आपको शायद ये कारण बताने से रोका गया होगा चलिए मैंने बता दिया है। मै भी भारत से कुपोषण हटाना चाहता हूँ पर टेलीविज़न पर नहीं बल्कि जमीनी हकीकत पर।


क्या आप सभी मेरे साथ है ??

रविवार, जून 16

बहाना तो समर कैंप का है

बहाना तो समर कैंप का है
असल में अपने साथियों के संग खिलखिला कर मुस्कुराना है
छोटो को हँसाना है, बड़ो को सिखाना है
समर कैंप तो एक बहाना है

कागज का सिपाही और दफ्ती की रानीबड़ी निराली थी 
नानी ने सुनाई कभी हमको ये कहानी थी
 

शनिवार, जनवरी 26

एक बच्ची स्कूल नहीं जाती, बकरी चराती है

एक बच्ची स्कूल नहीं जाती, बकरी चराती है
वह लकडियां बटोरकर घर लाती है
फिर मां के साथ भात पकाती है
एक बच्ची किताब का बोझ लादे स्कूल जाती है
शाम को थकी मांदी घर आती है
वह स्कूल से मिला होमवर्क मां-बाप से करवाती है
बोझ किताब का हो या लकडी का
बच्चियां ढोती हैं
लेकिन लकडी से चूल्हा जलेगा
तब पेट भरेगा
लकडी लाने वाली बच्ची यह जानती है
वह लकडी की उपयोगिता पहचानती है
किताब की बातें कब किस काम आती हैं
स्कूल जाने वाली बच्ची
बिना समझे रट जाती है
लकडी बटोरना
बकरी चराना
और मां के साथ भात पकाना
जो सचमुच घरेलू काम हैं
होमवर्क नहीं कहे जाते
लेकिन स्कूलों से मिले पाठों के अभ्यास
भले ही घरेलू काम न हों
होमवर्क कहलाते हैं
कब होगा
जब किताबें
सचमुच
होमवर्क से जुडेंगी
और लकडी बटोरने वाली बच्चियां भी
ऐसी किताबें पढेंगी

........श्याम बहादुर “नम्र” 




मंगलवार, नवंबर 13

दीपावली की शुभकामनाएं

आपको और आपके पूरे परिवार को बचपन के रंग परिवार की तरफ से दीपावली की शुभकामनाएं।



शनिवार, अक्टूबर 20

कविता - सर्दी आई

मुन्ना जी क्यों काँपे थर-थर,
क्या घर में हुई पिटाई। 
भैया ऐसी बात नहीं है,
मुझे कपकपाती सर्दी है आई। 


----सालेह 
अपना स्कूल
 पनकी पड़ाव 

गुरुवार, अक्टूबर 4

श्रवण कुमार का चित्र

अपना स्कूल पनकी पड़ाव की बच्ची शालेहा ने श्रवण कुमार का एक बहुत ही सुन्दर चित्र बनाया था जिसको में आप सभी के सामने रख रहा हूँ।

 

गुरुवार, सितंबर 20

मेरी कविता - बकरी

मेरी बकरी काली काली,
सीधी-सीधी भोली-भली।
इसकी तो हर बात निराली,
खाकर पत्ते करे जुगाली।
दूध इसका मीठा-मीठा, 
मुन्ना इसका बहुत अनूठा।

 कवि - काजीमुददीन
अपना स्कूल पनकी पड़ाव


रविवार, सितंबर 2

मेरी कविता - कुत्ता

मैंने झबरा कुत्ता पाला,
घर का सच्चा रखवाला।
भला बुरा यह सब कुछ जाने,
 चोरों को फ़ौरन पहचाने।
--- कजुमिदीन अपना स्कूल, पनकी पड़ाव 


शुक्रवार, अगस्त 31

मेरे चित्र

एक बच्ची ने एक बुजुर्ग को रस्ते पर लोगों से कुछ मांगते हुए देखा और वह उसको रोज देखती थी . एक दिन उस बच्ची ने अपने कला करने के समय में उस बुजुर्ग का चित्र बनाने की कोशिश की।