गुरुवार, सितंबर 12

भगवान और अल्लाह

लोग भगवान और अल्लाह के नाम पर एक दूसरों को मार काट रहे है और एक मेरा दिमाग है कि भगवान और अल्लाह को मानने के लिए तैयार नहीं है और मेरा दिल कहता है की मै उसको मानने के काबिल नहीं हूँ.…

अगर भगवान और अल्लाह को मानने पर लोगों को मारना काटना पड़ता है तो मै शुक्रिया कहना चाहता हूँ अपने दिल और दिमाग को …

बुधवार, अगस्त 14

कि हर कोई आज़ाद है …

कल हर जगह झण्डे फहराये जायेंगे
कल हर जगह लड्डू बाँटें जायेंगे
कल हर कोई किसी न किसी को बधाई दे रहा होगा
कल हर कोई एक झूठ को जी रहा होगा
कि हर कोई आज़ाद है.…
कि हर कोई आज़ाद है …

मंगलवार, जुलाई 23

'प्राइमरी स्कूल'

वो बस्ता.... वो पटरी...
दुधिया... और स्याही...
वो मुंशी जी की चपत...
औ पंडी जी की डांट...
वो मास्साब का टोकना...
कि... कैसे नहाते हो?
यहां मैल बैठा है...
वहां मैल बैठा है...
वो पन्द्रहअगस्त और छबिच्जन्वरी...
वो लड्डू का लालच... और प्रभात फेरी...
शनिवार की बालसभा...
इतवार की छुट्टी...
पल भर में मिल्ली औ...
पल भर में कुट्टी...
दू के दू और दू दुनी चार....
पूरा सुनाने पे गुरूजी का प्यार...
बहुत याद आता है...
अपना पहला स्कूल....
कैथी गाँव का......

'प्राइमरी स्कूल' .................वल्लभ (जुलाई १९८९)

मंगलवार, जुलाई 16

कहो "कुपोषण भारत छोड़ो"

आजकल अभिनेता आमिर खान को भारत से कुपोषण हटाने का जिम्मा या कहे तो ठेका मिला हुआ है, वह दूरदर्शन पर हर 15 मिनट में लोगों को बताते रहते है की कैसे कुपोषण को दूर भगाना है जिसमे वह कहते है की लड़की की शादी 18 साल के बाद करना है। कुछ युवा भी आमिर के साथ दीखते है जो सपथ लेते है की वह 18 साल और इससे बड़ी लड़की से ही शादी करेंगे। 6 महीने तक बच्चे को माँ का दूध देना है। ऐसे की कई तरीके बताते है।

मेरे पास भी एक तरीका है जिससे कुपोषण ख़त्म हो या न हो पर कम जरुर हो जायेगा। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दिया जाने वाले आहार सही में उनको दिया जाये और इस आहार की काला बाजारी रोकी जाये।

आमिर जी आपको शायद ये कारण बताने से रोका गया होगा चलिए मैंने बता दिया है। मै भी भारत से कुपोषण हटाना चाहता हूँ पर टेलीविज़न पर नहीं बल्कि जमीनी हकीकत पर।


क्या आप सभी मेरे साथ है ??

रविवार, जून 16

बहाना तो समर कैंप का है

बहाना तो समर कैंप का है
असल में अपने साथियों के संग खिलखिला कर मुस्कुराना है
छोटो को हँसाना है, बड़ो को सिखाना है
समर कैंप तो एक बहाना है

कागज का सिपाही और दफ्ती की रानीबड़ी निराली थी 
नानी ने सुनाई कभी हमको ये कहानी थी
 

शनिवार, जनवरी 26

एक बच्ची स्कूल नहीं जाती, बकरी चराती है

एक बच्ची स्कूल नहीं जाती, बकरी चराती है
वह लकडियां बटोरकर घर लाती है
फिर मां के साथ भात पकाती है
एक बच्ची किताब का बोझ लादे स्कूल जाती है
शाम को थकी मांदी घर आती है
वह स्कूल से मिला होमवर्क मां-बाप से करवाती है
बोझ किताब का हो या लकडी का
बच्चियां ढोती हैं
लेकिन लकडी से चूल्हा जलेगा
तब पेट भरेगा
लकडी लाने वाली बच्ची यह जानती है
वह लकडी की उपयोगिता पहचानती है
किताब की बातें कब किस काम आती हैं
स्कूल जाने वाली बच्ची
बिना समझे रट जाती है
लकडी बटोरना
बकरी चराना
और मां के साथ भात पकाना
जो सचमुच घरेलू काम हैं
होमवर्क नहीं कहे जाते
लेकिन स्कूलों से मिले पाठों के अभ्यास
भले ही घरेलू काम न हों
होमवर्क कहलाते हैं
कब होगा
जब किताबें
सचमुच
होमवर्क से जुडेंगी
और लकडी बटोरने वाली बच्चियां भी
ऐसी किताबें पढेंगी

........श्याम बहादुर “नम्र” 




मंगलवार, नवंबर 13

दीपावली की शुभकामनाएं

आपको और आपके पूरे परिवार को बचपन के रंग परिवार की तरफ से दीपावली की शुभकामनाएं।



शनिवार, अक्टूबर 20

कविता - सर्दी आई

मुन्ना जी क्यों काँपे थर-थर,
क्या घर में हुई पिटाई। 
भैया ऐसी बात नहीं है,
मुझे कपकपाती सर्दी है आई। 


----सालेह 
अपना स्कूल
 पनकी पड़ाव 

गुरुवार, अक्टूबर 4

श्रवण कुमार का चित्र

अपना स्कूल पनकी पड़ाव की बच्ची शालेहा ने श्रवण कुमार का एक बहुत ही सुन्दर चित्र बनाया था जिसको में आप सभी के सामने रख रहा हूँ।