बुधवार, फ़रवरी 16

ग्रामीण भारत की सही तस्वीर

  
अपने ग्रामीण भारत की सही तस्वीर, जिसके पास है बहुत है और कुछ लोग ऐसे है की वो किसी   तरह अपना गुजरा चला रहे है वो शायद वही लोग जानते है. ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा कुछ लोग के पास होता है और एक छोटे से हिस्से में पूरा गाँव रहता और अपनी रोटी, कपडे और मकान का जुगाड़ करने की कोशिश करता है. वो इतनी ज़मीन में सिर्फ इतनी रोटी निकाल पाता है जिससे वो कल तक जीवित रहे. 
क्या सही मायने में भारत ने तरक्की की है या तरक्की सिर्फ कुछ लोगो की हुई है, अब समय आ गया है जब हम सभी को इन सवालों के जवाब को खोजना चाहिए???


शुक्रवार, फ़रवरी 11

भारत में आय का सही वितरण

आपने अतुल्य भारत में आय का सही वितरण जिसके द्वारा सरकार लोगों में फासले को कम करना चाहती है.
कही पर 224 रुपये दिन के तय है और वो भी पूरे नहीं मिलते है, मिलता है 70 से लेकर 150 तक जो जितना पा जाये और साथ में 12 से 15 घंटे काम, ठेकेदार की गालियाँ, उसके मार सब साथ में ही मिलता है............. और कही 700 से लेकर 3000 और (किसी-किसी की तो सोचना भी मुस्किल है) दिन का और वो भी पक्का है की मिलेगा ही मिलेगा........

गुरुवार, फ़रवरी 3

विज्ञान और सामाजिक विज्ञान मेला

स्वामी विवेकानंद विद्यालय, लोधर जो की जागृति बाल विकास समिति, कानपुर के द्वारा लोधर और आस-पास के गांवों के बच्चों को पढ़ने और उनको एक बेहतर इंसान बनाने के लिए चलाया जा रहा है, में  हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विज्ञान और सामाजिक विज्ञान मेला का आयोजन किया जा रहा है जो की दिनांक 5  और 6 फ़रवरी को 10 बजे से शाम ४ बजे तक चलेगा. आप सभी लोग उसमे सादर आमंत्रित है. मेले में बच्चे सीखी हुई बातों में से जो उनको अच्छा लगा उसको विभिन माडल के रूप में रखेंगें.
दिनांक 7 फ़रवरी को बच्चों का सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन शाम 3 से 6 बजे किया गया.

आप सभी जरुर आये और उनका मनोबल बढ़ाएं.

ये विद्यालय आई आई टी कानपुर के पीछे नानकारी है और नानकारी के थोडा से पीछे चलेंगे तो लोधर गाँव आएगा.

सोमवार, जनवरी 31

हमें भी ख्व़ाब आते हैं

थकी हुई सी पलकों पे भी ख्व़ाब आते हैं,
सहर होने को है ये शोर बेहिसाब आते हैं।

हों मुफलिसी ग़रीबी के दर्द लाखों फिर भी,
हँस के जीने के तरीके लाजवाब आते हैं।

जर्ज़र है दर-ओ-दीवार घर की तो क्या हुआ,
हमारे ख़यालों में गुम्बद और मेहराब आते हैं।

हम भूलते हैं राह जो कहीं भी सफर में,
तो राह बताने चाँद और आफ़ताब आते हैं।

थक हार के जब कहते हैं कि कुछ ना बदलेगा,
हवाओं के साथ तभी नज़्म-ए-इन्क़लाब आते हैं।

.... मोहम्मद ज़फ़र

रविवार, जनवरी 30

बापू


बापू की राह पर चलना

बापू की राह पर चलना,
बहुत मुश्किल लगता है...

किसी की गाली का जवाब,
चुप रह कर देना बहुत मुश्किल लगता है...

किसी के थप्पड़ का जवाब,
दूसरा गाल आगे कर के देना बहुत मुश्किल लगता है...

पर मेरे दोस्त सोचो तो जरा बापू की रह पर चलना,
नामुमकिन तो नहीं लगता है ...

......दीन दयाल

शुक्रवार, जनवरी 28

सलाम साथियों

सलाम साथियों
जैसा की आप सभी जानते है की बचपन के रंग के द्वारा हम अपने मन की बात आप सभी तक पहचानें की कोशिश करते है इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए, बचपन के रंग ने अपनी एक पत्रिका २६ जनवरी से शुरु की है. पत्रिका निकालने की सोच पनकी पड़ाव के अपना स्कूल से शुरु हुई और वहीं से इसकी शुरुवात हुई.
नीचे कुछ फोटो है आप जरुर देखे.

 

...............धन्यवाद