अपने ग्रामीण भारत की सही तस्वीर, जिसके पास है बहुत है और कुछ लोग ऐसे है की वो किसी तरह अपना गुजरा चला रहे है वो शायद वही लोग जानते है. ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा कुछ लोग के पास होता है और एक छोटे से हिस्से में पूरा गाँव रहता और अपनी रोटी, कपडे और मकान का जुगाड़ करने की कोशिश करता है. वो इतनी ज़मीन में सिर्फ इतनी रोटी निकाल पाता है जिससे वो कल तक जीवित रहे.
क्या सही मायने में भारत ने तरक्की की है या तरक्की सिर्फ कुछ लोगो की हुई है, अब समय आ गया है जब हम सभी को इन सवालों के जवाब को खोजना चाहिए???